Thursday, September 15, 2016

छोटी सी हूँ मै

बड़ी बड़ी क़िताबे
छोटी सी हूँ मैं

बातें है बड़ी बड़ी 
छोटी सी हूँ मैं

सपने भी है बड़े बड़े
लेकिन छोटी सी हूँ मैं

अरमान है बड़े बड़े
चाहते है बिखरी पड़ी
समेटना जो चाहूँ मै
बिखर सी फिर जाती है
क्यूँकी छोटी सी हूँ मै

ख्वाहिश कुछ अधूरी सी
है कसक उनमें बाक़ी
चाहूँ जो पूरी करना मै
क्यूँकी छोटी सी हूँ में
किताबें है बड़ी बड़ी.. 



अलमारी से झाँक कर
मुझको चिढा रही वो
बड़ी बड़ी सी किताबें 
मुझको बुला रही
समेटने को खुद मै
बंद पेजों की पंक्तियों में
मुझको उतरती
पर डर जाती हूँ 
सहम जाती हूँ मैं 
उलझ ना जाऊ कही
शब्दों के ताने बने में
पन्ने जब भी पलटती
क्यूँकी .............?
बड़ी बड़ी किताबें
छोटी सी हूँ मैं....

एहसास मुझे 
पल पल है होता
छोटी हुई तो क्या हुआ
होंसला है बड़ा बड़ा
किताब ही सवाल है
जवाब भी किताब है
ढूंड रही हूँ उनको में
क्यूँकी छोटी सी हूँ मै
ख़ुश हूँ खुशहाल हूँ मै.....

Great People.. Love You All :)