Tuesday, November 08, 2016

खुला आसमान


समंदर का किनारा, खुला आसमान
साहिल से टकराती लहरों के बीच
छाई है हर जर्रे जर्रे में है बेहोशी!
गुलाबी होंठ काले नैन,चन्दन सा बदन
क्या कुछ नहीं है उन घनी ज़ुल्फ़ों में,

एक सागर है हिलोरें मारता,
एक चाँद है उसकी वजह! 




लहराती जुल्फ़े,हवाओ में घोंलती
लीची सी ख़ुशबू की मदहोशी!
खामोश रहना,कुछ न कहना
कुछ ना कहकर,सब कुछ कहना
ये हवाओं की है सरगोशी!
कोई सलिका उनका,कुछ कह जाये
जो हम न समझ पाये,यही तो है
कुछ हमारी खामोशी!
मौसम है सुहाना,और चलते है जाना
खुला है आसमान,मंजर है दोषी...
करम है नजरों का,निगाहे नज़र बंद है
रुत है पिया मिलन की,है उस में गर्मजोशी.....!
*नेमी मीना*

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