Sunday, October 30, 2016

ख़ामोशियाँ मेरी

ख़ामोशियाँ तेरी 
नाराज़गी है क्या ?
बोल दो ना
विवाद, तकरार है क्या..?

वजह जो भी हो
सज़ा जो भी हो
कभी हम पर लागू हो
कभी तुम पर लागू हो
फिर ज़माना जो भी हो

फिर ये कहना सुनना 
अच्छा लगता है तुमसे 
बातों बातों में ही 
उलझना अच्छा लगता है

मिट जाती है थकान 
युही दिनभर की
जब एक मुस्करान 
सांझ को मिलने आती है
प्यार भरी
तकरार के बाद 
बातों की गपसप के बीच
काफ़ी की चुस्कियो के साथ
यही तो है प्रेम है ना प्रेम

Great People.. Love You All :)