Monday, April 18, 2016

हाँ मेरा प्यार तुम्हारे लिए मेरे पास

आज फिर चल दिए
छुड़ा के हाथ मेरा तुम
आज फिर भुला दिए
किये थे जो कितने वादे तुमने



तू ही बता दे मुझे अब कि
जब जानती थी जाना तय है तुम्हारा
फिर भी इंतज़ार तेरा था क्यूँ
दिल इतना मज़बूर मेरा था क्यूँ।

आखिर, तूने किये तय वो रस्ते
जो शायद मैं ना कर पाती हँसके
अच्छा ही हुआ कि तुमने किया
हाँ, मैं शायद ना ही कर पाती
जो कर पाये तुम।

खेल शब्दों का तो अच्छा है
पर दिलों के खेल नहीं जानती
प्यार किया चाहे तुम थे या न थे
पर प्यार हमेशा था मेरे साथ
हाँ, मेरा प्यार, तुम्हारे लिए, मेरे पास।

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