Monday, June 22, 2015

सुन रही थी सुद बुद् खोके जैसे मैं कहानी


ओ रे मनवा तू तो बावरा था।
तू ही जाने तू क्या सोचता था
तू क्या सोचता था बावरे
क्यूँ दिखाए तूने सपने सोते जागते
जो थे ना तेरे वास्ते

कैसे मैं चली 
देख ना सकी
अनजाने रास्ते
गूंजा सा था कोई एक तारा 


सुन रही थी सूद बुद् खोके जैसे मैं कहानी...
अधूरी कहानी थी ये कहाँ था पता।
जहाँ से शुरू हुई वहीँ पर खत्म
इतनी कहानी थी ये 
कहाँ था पता

ओ रे मनवा तू तो बावरा था
तू ही जाने तू क्या सोचता था
तू क्या सोचता था बावरे

3 comments:

  1. Always loved this song. And Kavita Seth's voice.

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    1. I love this song too and very close to my heart. And this is a remake version of it.

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    2. I love this song too and very close to my heart. And this is a remake version of it.

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