Saturday, May 23, 2015

क्या मैं भी तुझे इतना ही याद आती हूँ

सोचती हु 
क्या मैं भी तुझे इतना ही याद आती हूँ 
सदियाँ बीती लगता यूँ 
जब तुझसे मिलने का इन्तजार होता था 
आज तो बस पता है 
कि तू सिर्फ यादों में बसा है 
सच्चाई तेरा दूर दूर तक कोई वास्ता ही नही 


सोचती हु 
क्या मैं भी तुझे इतना ही याद आती हूँ 
फिर लगता है 
क्या सिर्फ एक सपने को जी रही थी 
जोकि टूट कर बिखर चूका है 
क्या हम यूँ ही मिले थे 
हमारे मिलने कोई खास मक़्सद था

सोचती हु 

क्या मैं भी तुझे इतना ही याद आती हूँ 

Great People.. Love You All :)