Sunday, January 05, 2014

याद आते है वो प्यारे प्यारे स्कूल के दिन

याद आते है वो प्यारे प्यारे स्कूल के दिन
ना जानते थे कभी स्कूल अपने दोस्तों के बिन

कैसो थी वो दोस्ती और कैसा था वो प्यार
एक दिन की जुदाई से डरता था जब आता था रविवार

चलते  चलते पत्थरो पर मारते थे ठोकर
कभी हंसकर चलते थे तो कभी चलते थे रोकर

कंधे पर बस्ता लिए और हाथ में लेकर बोतल पानी
किसे पता था बच्पन की दोस्ती को बिछड़ा देगी ये जवानी

याद आते है वो इंक सयहे भरे हुए हाथ
क्या दिन थे वो जब सब मिलकर करते थे लंच साथ

छुट्टी की घंटी सुनते ही भागकर कक्षा से बहार आना
फिर हस्ते हस्ते सभी से मिल जाना

काश वो बच्पन आज फिर लौट आये
और सब दोस्त आज फिर मुझे वापस मिल जाएं

No comments:

Post a Comment

I love to hear from you about this post..

Great People.. Love You All :)