Friday, September 27, 2013

तन्हा अक़ेली चल रही थी

तन्हा अक़ेली चल रही थी
उन राहों पर जहाँ कोई अपना 
ना दिखता था,

राहें ऐसी जिसमे सिर्फ़
तूफान और ब्वन्डर 
ही दिखते थे,

सोचती थी रुक कर अक्सर,
कभी गिरी अगर तो,
कौन मुझे संभालेगा.

सोचती थी रुक कर अक्सर,
कभी रास्ता ना दिखा तो,
कौन मुझे दिखाएगा

जिंदगी की भीड़ मे भी
अक्सर तन्हा हो जाती
पर कुछ साँझ नही पा




आख़िर वो दिन आया
ठोकर लगी
पैर डगमगया

डर तो गई बहुत,
और हुई 
आँखें बन्द,

आँखें खुली तो
दिल मुस्कुराया

मंज़र था कुछ यों

मेरी छोटी हथेलियों
को जाने कितने 
हाथों ने पकड़ा था

ये देख दिल मुस्कुराया
और मुझे समझाया
फिकर थी तेरी बस
ऐसे ही,

तूने ना जाने कितने हाथ पाए


ना अब मैने कभी 
अपने को तन्हा पाया
दिल ने मुझे बहुत समझाया




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Thursday, September 26, 2013

कितने ख्याल, कितनी बातें

कितने ख्याल, कितनी बातें दिल मे दबाए बैठी हूँ,
जैसे कोई तूफ़ान छुपाए बैठी हूँ

क्या ख़्याल, क्या बातें, कितनी कहानियाँ, कितने किस्से,
सभी को एक माले मे पिरोए बैठी हूँ

एक एक मोती मे एक एक किस्से
लगता है तुझे इस माले मे संजोय बैठी हूँ

क्या चाहती हू तुझसे नही जानती
पर तुझे अपने सपने मे संजोय बैठी हूँ

तेरा नाम जपु एक जोगन सी
एक उम्मीद तुझमे संजोय बैठी हूँ

सुनेगा किसी दिन इस उम्मीद को
बस इसी उम्मीद को संजोय बैठी हू


कितने ख्याल, कितनी बातें दिल मे दबाए बैठी हूँ,
जैसे कोई तूफ़ान छुपाए बैठी हूँ

इतने किस्से इतनी कहानियाँ, तू इन सब मे तो है
पर क्यू मेरे साथ नही है, फिर क्यू तुझे मैं संजोय बैठी हूँ


क्यूँ तू साथ हो कर भी साथ नही है
क्यू तेरे ख़यालों से परे कोई बात नही है

क्यू तेरे ख्याल ही मेरे साथ,
क्यू तू मेरे साथ नही है

थोडा वक़्त निकल मेरे लिए भी
चल तुझे ले चलूं एक दूसरी ही दुनिया मे

जहाँ है ना जाने कितनी ही तेरी कहानियाँ
तेरे कितने ही किस्से, ना जाने कितने ही सपने

कितने ख्याल, कितनी बातें दिल मे दबाए बैठी हूँ,
जैसे कोई तूफ़ान छुपाए बैठी हूँ







Great People.. Love You All :)