Wednesday, August 07, 2013

पढती हूँ किताब, लिखती हूँ ख्याल




पढती हूँ किताब, लिखती हूँ ख्याल
देखती हूँ सपने, उड़ती हूँ ख्यालों में,
ना समझना इसे कोई कविता,
ये सिर्फ हैं मेरे ख्याल,
मात्र हैं ये कुछ पंक्तियाँ

पढती हूँ किताब, लिखती हूँ ख्याल
रेत पर चतली हूँ, कुछ सपने बुनती हूँ
सोचती हूँ ये खुशियाँ ठहर जाये मेरे साथ
पर ख्याल आता है रेत  नहीं रुकता हाथ में
तो कैसे रुकेंगी ये खुशियाँ

पढती हूँ किताब, लिखती हूँ ख्याल
कॉफ़ी कम , मसाला चाय ज्यादा पीना पसंद करती हूँ 
सुबह की चाय मेरे लिए मैडिटेशन है.
लम्बे और बिखरे बाल रखती हूँ 
बहुत बातें करती हूँ 

पढती हूँ किताब, लिखती हूँ ख्याल
बहुत  घुमाना पसन्द करती हूँ.
बहुत हँसना पसन्द करती हूँ.
कभी ख्यालों में सपने बुनती हूँ 
कभी उन सपनों को पाने की कोशीश करती हूँ 

पढती हूँ किताब, लिखती हूँ ख्याल
देखती हूँ सपने, उड़ती हूँ ख्यालों में, 

Great People.. Love You All :)